रसगुल्ले पर शायरी का अनोखा संग्रह – जहाँ मिठास और मुहब्बत दोनों घुलते हैं। अगर आपको मीठा खाना और शायरी पढ़ना दोनों पसंद है, तो यह पोस्ट आपके लिए ही है। यहाँ आपको रसगुल्ले की चाशनी में डूबी हुई हर अदा मिलेगी – कभी मासूम, कभी शरारती, तो कभी बेवफाई के दर्द से भरी। चाहे आप rasgulle par shayari ढूंढ रहे हों दिल की बात कहने के लिए, या फिर rasgulla shayari in hindi पढ़कर अपने रसगुल्ला प्रेमी दोस्तों को हैंग करना चाहते हों – ये लम्हे बस आपके इंतज़ार में हैं। तो आइए, डुबकी लगाइए इस मीठी-मीठी शायरी की चाशनी में और महसूस कीजिए हर लफ्ज़ में बसी हुई रसगुल्ले पर शायरी का अनोखा स्वाद। 🍬
सुन बे रसगुल्ले वाली,
कैसी जा रही है जिंदगी तेरी चुल्हे वाली।
र से रसगुल्ला होता है
ध से हर कोई दूध का धुला होता है,
जो प्यार करले तुझसे बाद में
हर तरफ रोला होता है।

जिसने एक बार चखली रसगुल्ले की मिठास,
उसके बाद उसे कुछ भी नहीं आएगा रास।
आजकल के रसगुल्ले में चीनी ज्यादा होती है,
फिर भी पब्लिक उसको खाने को आमादा होती है।
रसगुल्ले सी मेरी जिंदगी – पता नहीं कब नमकीन बन गई,
करूं तो क्या करूं, जो कभी काली कलुटी थी,
बहुत सालों बाद हद से ज्यादा हसीन बन गई।
रसगुल्ले का रस हर कोई नीचोड़ के खाता है,
बेवफा से प्यार करने वाला अक्सर उसे छोड़कर जाता है।
जब से खाए हैं तेरे हाथ के रसगुल्ले,
नींद सकून सब कुछ भूले।

वह कमीनी तो रसगुल्ला चोर थी,
जिसे हमने अपना समझा – वह मुहब्बत कोई और थी।
तू ना कहेगी तो भी तुझसे प्यार करेंगे,
तू रसगुल्लों की रानी है, कैसे तुझे इनकार करेंगे।
बहती नदी में हर कोई हाथ धोना चाहता है,
तू रसगुल्लों की रानी है – तेरा हर कोई होना चाहता है।
रसगुल्ला अगर खाया ज्यादा, तो नुकसान करेगा,
अगर लगाया रसगुल्ले से दिल, तो परेशान करेगा।

मैं तो रसगुल्ले जैसी हूं,
भले ही 30 की हो गई, मगर आज भी वैसे की वैसी हूं।
उसके घर के आगे रसगुल्लों की दुकान थी,
तभी मैं सोचूं – पब्लिक रसगुल्ले लेने के लिए क्यों इतनी परेशान थी।
रसगुल्ला एक धीमा जहर है –
ना खाओगे तो मन करेगा,
अगर खाओगे तो तुम पर कहर है।
तेरी बातों में वही चाशनी और वही घुलाव है,
जैसे सफेद रसगुल्ला – मिठास का आखिरी पड़ाव है।

नाराजगी छोड़ो और मुस्कुराकर बात करो,
रसगुल्ले की मिठास से इस रिश्ते की शुरुआत करो।
तेरी हर अदा पर मरता हूं मैं,
रसगुल्ले जैसी तेरी जुबान है –
इसलिए तो तुझसे प्यार करता हूं मैं।
श्मशान में चिता जला देना, जमीन में दफना देना,
मगर मौत के बाद भी उसके हाथों से एक रसगुल्ला खिला देना।
उसके होंठों पर रसगुल्ले की मिठास थी,
इसलिए तो वो मेरी सबसे खास थी।
जिस मिठाई की दुकान में रसगुल्ला नहीं होता,
समझो उसका शटर खुला होकर भी खुला नहीं होता।
तुझे देखकर रास्ता भूल जाते हैं हम,
तू हमारा सपना है यारा –
इसलिए तो रसगुल्ला लेकर इतनी दूर जाते हैं हम।

तू रसगुल्लों की दुकान सजा ले,
ताकि देखकर उनको हर कोई मजा ले।
सफेद सा रंग, मखमली अहसास है,
हर महफिल में रसगुल्ला सबसे खास है।
जैसे ही रखा जुबां पर, सारा तनाव घुल गया,
रसगुल्ले को देखकर जन्नत का दरवाजा खुल गया।
इश्क और रसगुल्ले में बस इतना सा फर्क है जनाब –
एक दिल में डूबता है, दूसरा चाशनी में!
दुनिया जहां की मिठाई देखी, फिर भी रसगुल्ला सबसे खास है –
क्योंकि मेरी वाली को वो सबसे अधिक पसंद है।
जब खाता हूं रसगुल्ला तो दिल को सकून मिलता है,
जब देखता हूं तुझे तो जीने का जुनून मिलता है।
नज़ाकत देखो इस सफेद गोल घेरे की,
जैसे मिठास भरी चाशनी हो हसीन चेहरे की।
वो लफ्जों को रसगुल्ले की तरह चाशनी में डुबोकर बोलती है,
जब भी बात करती है, फिजाओं में प्यार का रस घोलती है।

चाहे खालो दुनिया भर के पकवान और मिठाई,
मगर रसगुल्ले से सब नीचे हैं मेरे भाई।
रसगुल्ला बड़े-बड़े अमीरों की पसंद है,
जो उसे खिला दे रसगुल्ला प्यार का –
समझो उसके साथ कुछ ना कुछ संबंध है।
तेरी यादें भी किसी रसगुल्ले से कम नहीं,
जितना दबाते हैं, उतना ही मीठा रस निकलता है।
कितना भी दबाओ – मिठास फिर भी बरकरार रहता है,
है अगर मुहब्बत सच्ची तो इंसान बेदाग रहता है।
हर दावत की रौनक, हर दिल का करार है,
रसगुल्ला सिर्फ मिठाई नहीं, खुशियों का अवतार है।
मिठास ऐसी कि कड़वाहट का नाम-ओ-निशान न रहे,
एक बार अगर खा लिया तेरे हाथ का रसगुल्ला –
तो गम भी कोई खास न रहे।

तेरी सादगी पर तो पूरा जमाना फिदा है,
मगर सफेद रसगुल्ले की भी अपनी इक अदा है।
वो कहती है मैं बहुत ‘Sweet’ हूँ,
मैंने भी कह दिया मुस्कुराकर –
मैं भी तुझे पाए बिना जाऊंगा नहीं, पूरा ठीठ हूं।
तेरा रसगुल्ला देखकर मैं भी बहक गया था,
मालूम नहीं था तू इतनी हसीन है –
तभी तो जमाना चहक गया था।
चाशनी में डूबा हुआ वो कोमल अहसास है,
रसगुल्ला तो हर किसी के लिए खास है।
दुनिया ढूंढती है सुकून इबादत और खानकाहों में,
हमें तो जन्नत मिल जाती है रसगुल्ले की बागानों में।

वो लफ्ज भी अब चाशनी में डूबे हुए से लगते हैं,
तेरे रसगुल्ले जैसे होठों के मिठास के साथ
आजकल हम जगते हैं।
तुम्हारी मुस्कुराहट भी किसी रसगुल्ले से कम नहीं,
जवानी तुम्हारी सारी ढल चुकी है,
फिर भी तू किसी परी से कम नहीं।
न इसमें कोई मिलावट है, न रंगों का कोई शोर,
सादगी इतनी कि नहीं है तेरे समान कोई दूसरा और।
लोग ढूंढते हैं सुकून महंगी बोतलों और जाम में,
हमें तो राहत मिल जाती है बस एक रसगुल्ले के नाम में।

प्लेट में रखा वो सफेद गोला, जैसे बादलों का कोई टुकड़ा हो,
खाते ही ऐसा लगे जैसे किसी हसीन से रूबरू मुखड़ा हो।
परी है तू गुलाब की,
तेरे रसगुल्ले के आगे क्या है बोतल भरी शराब की।
समंदर की तो रानी हो तुम,
रसगुल्ले जैसी हो हसीन –
और एक मस्त कहानी हो तुम।
चाशनी में डूबा हुआ वो इश्क का पैगाम है,
तू सिर्फ एक रसगुल्ला नहीं – मेरे दिल का सुल्तान है।

वो जब रसगुल्ले की चाशनी सा मुस्कुराती है,
मां कसम – दिल में आग सी लग जाती है।
हमें तो बस तेरी रसगुल्ले जैसी सादगी ने लुटा,
तेरे चक्कर में घर-बार सब कुछ छूटा।
कहने को तो तू रसगुल्ले जैसी मीठी है,
मगर मेरे जैसा आशिक तेरे आगे बस एक चींटी है।
कबूतर अगर सफेद है, आजकल के रसगुल्ले में भी भेद है,
वफादार कोई नहीं – हर किसी के दिल में छेद है।
वह प्यार की चाशनी में रसगुल्ले को डुबोकर खाती है,
हम पहले से ही शुगर के मरीज हैं, फिर भी वो सपने में आती है।

चाशनी में डूबा हुआ सफेद सा वो नूर है,
रसगुल्ले का स्वाद तो हर दिल में मशहूर है।
तेरे रसगुल्ले जैसे होंठों का रस हमें पिलाया कर,
अगर प्यार हमसे इतना ही अधिक है,
तो अपने पास बैठकर हमें खिलाया कर।
रसगुल्ला, तेरा बड़ा कमाल का है –
चूस के रस इसका थक चुका जमाना,
फिर भी साला बेमिशाल का है।
रसगुल्लों में पड़ी मक्खी भी मजे करती है,
मर भले ही जाए – मगर फिर
जिंदगी से ना कोई वजह करती है।

उसकी बातों में रसगुल्ले जैसी मिठास थी,
हमें क्या पता था कि पीछे जहर की प्यास थी।
हम तो चाशनी समझकर उसे पीते रहे,
पर वो कमबख्त मौत का अहसास थी।
वो साली रसगुल्ला खिलाकर दिल पर वार करती है,
उसकी फितरत अब आई समझ –
जो मीठा बोलती है, वही तकरार करती है।
इश्क का रसगुल्ला हमने बड़े शौक से खाया था,
पर चाशनी में उसने जहर-ए-जुदाई मिलाया था।
वह मेरी कब्र पर रोज रसगुल्ले चढ़ाती है,
मैं तो मर ही चुका हूं कब का –
फिर भी वह मारने मुझे अक्सर आ जाती है।
जिस तरह मांग है भटुरे और छोले की,
उसी तरह दुनिया दीवानी है उसके रसगुल्ले की।

रसगुल्ले जैसी नजरों वाली, काले-काले गजरों वाली,
दिल लूट ले गई साली।
दिल करता है तेरे रसगुल्ले का पूरा रस चूस लूं,
तू माने या ना माने – फिर भी तुझे चूम लूं।
लोग कहते हैं – हद होती है बेशर्मी की,
मगर क्या करें – कीमत तो चुकानी होगी
तेरे रसगुल्ले जैसी गर्मी की।
वो रसगुल्ले की तरह गोल और सफेद है,
उसे देखकर दिल में होता थोड़ा सा छेद है।
जी चाहता है उसे चाशनी समेत गटक जाऊं,
मगर बेवफा है वो साली – यही तो सबसे बड़ा भेद है।
तेरी कमर का लचका और रसगुल्ले की नरमी,
कमबख्त बढ़ा देती है इस जाड़े में भी गर्मी।

मैं दास हूं तेरा, तू है रसगुल्ला मेरा,
आजा बसा लेते हैं चांद पर बसेरा।
ना जहर पिला मुझे, ना कोई शराब दे,
बस एक प्लेट रसगुल्ला और अपना शबाब दे।
लोग कहते हैं कि तू बहुत मीठी है बातों में,
जरा चख लेने दे स्वाद तेरा कुछ रातों में।
रसगुल्ला एक मीठा जहर है –
कितना खाऊं रसगुल्ला भी –
मेरे पास तो रसगुल्लों का एक शहर है।
रसगुल्लों को छोड़कर वो आजकल शराब को पसंद करने लगे हैं,
एक चुम्मा क्या मांग लिया – अकेले में मिलने से डरने लगे हैं।
लोग कहते हैं शराब पीने से गम भूल जाते हैं,
हम तो रसगुल्ला खाकर भी सुकून पा जाते हैं।
बस डर यही है कि कहीं नशा चढ़ ना जाए –
क्योंकि रसगुल्ले भी अब ‘चाशनी’ में डूबे आते हैं।
जिंदगी की कड़वाहट पीते-पीते थक गया हूं मैं,
अब रसगुल्ले की चाशनी का रस पीने दे।
अगर नहीं करती हो हमसे मुहब्बत तो
कम से कम शांति से जीने दे।
भले ही दिल का बुरा हूं मैं,
बिना चाशनी के रसगुल्ला अधूरा हूं मैं।
तेरी जवानी क्या है –
जैसे किसी हलवाई की दुकान का ताजा-ताजा रसगुल्ला…
बस देखने भर से ही मुंह में पानी आ जाए।
लोग शराब पीकर बहकते हैं,
हम तो तेरी रसगुल्ले सी जवानी में मदहोश हैं।
सफेदी ऐसी कि चांद भी शरमा जाए,
और मिठास ऐसी कि सारा शहर खामोश है।
तेरी रसगुल्ले जैसी जवानी का क्या कहना –
जैसे चाशनी में डूबा कोई हसीन गहना।
गोरा रंग और उस पर ये बला की नरमी,
मुश्किल है इस मिठास से बचकर रहना।
हुस्न की परी है तू,
रसगुल्ले की मिठास से बनी है तू।
देखकर तेरी रसगुल्ले जैसी जवानी को दिल मेरा डोल जाए,
जब तू मेरे पास से गुजरे तो मन ‘आई लव यू’ बोल जाए।
दिल को बहकाया मत कर,
रसगुल्ला सिखाकर हमको –
प्यार करना सिखाया मत कर।
ना कोई रंग है फीका, ना कोई अंदाज पुराना,
तेरा रसगुल्ले सा बदन – और ये चढ़ती जवानी का जमाना।
अक्सर काले सांप लिपटे रहते हैं चंदन पर,
मत कर गुमान ऐ हसीना – अपने रसगुल्ले जैसे बदन पर।
रसगुल्लों के इस गांव में बारात लेकर मैं आऊंगा,
तेरा दीवाना हूं मैं – हर वक्त तुझे सताऊंगा।
देखकर तुझे दिल यही फरियाद करता है,
रसगुल्ले का दीवाना अक्सर मुझे भी रात में याद करता है।
रिश्ता है 7 जन्मों का है –
मगर रसगुल्ले पर नियत फिसल गई।
किस्मत ही खराब थी –
बिना गोली के ही बंदूक चल गई।
तेरा हुस्न और ये रसगुल्ले सी मासूमियत…
कमबख्त कत्ल भी करती है तो बड़ी मिठास के साथ।
सफेद सा रंग और ये रसगुल्ले जैसी नरमी,
कमबख्त बढ़ा देती है इस मौसम में भी गर्मी।
गर्मी सारी इक पल में निकाल देंगे हम रसगुल्ले तेरे,
तेरे सारे दुख-दर्द को टाल देंगे।
तेरी जिंदगी का सपना हम पूरा करेंगे,
तू माने या ना माने –
रसगुल्ले के साथ सुलह करेंगे।
चलो रसगुल्ले खिलाकर प्यार का इजहार करते हैं,
वो माने या ना माने – फिर भी हम उनसे प्यार करते हैं।
चाशनी में डूबी हुई तेरी हर एक अदा है,
तू हसीना नहीं – खुदा की दी हुई एक वजह है।
देखा तुझे तो सारा जमाना भूल गया,
तू रसगुल्ला है मेरी –
तूने मरने को क्या कहा –
मैं खुद फांसी पर झूल गया।
प्यार पर किसी को भरोसा नहीं होता,
एक बार रसगुल्ले का स्वाद चख लो –
तो उसके बेवफा होने का धोखा नहीं होता।
गुमनाम दिल पर 150 बेस्ट शायरी क्लेकशन सिर्फ आपके लिए है

नमस्ते, मैं हूँ पूजा।
शब्दों के इस अंतहीन सफर में मुझे एक दशक से अधिक का समय हो गया है। बीते 10 वर्षों में मैंने कई बड़े न्यूज़ ब्लॉग्स के लिए रिपोर्टिंग की और तथ्यों को कागजों पर उतारा, लेकिन खबरों की इस भागदौड़ और औपचारिकता के बीच मेरी रूह हमेशा शायरी की तलाश में रही। मेरा मानना है कि जो बात खबरें नहीं कह पातीं, वो एक छोटा सा शेर कह देता है।
shayarigirl.in मेरी उसी रूहानी तलाश का नतीजा है। यहाँ मेरी कलम से निकले शब्द सिर्फ पंक्तियाँ नहीं, बल्कि ज़िंदगी के हर रंग—इश्क, दर्द, उम्मीद और खुशियों की सच्ची कहानियाँ हैं।
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आपकी अपनी,
पूजा